31 जुलाई 2013 - 19:30
मजलिस में फ़ायरिंग के दोषियों पर कार्यवाही हो जाती तो आज जुलूस पर हमला न होता।

मजलिसे ओलमाए हिंद के जनरल सिक्रेट्री मौलाना सय्यद कल्बे जवाद नक़वी नें कहा कि शांतिपूर्ण धार्मिक जुलूस के अपमान में पूरी तरह से प्रशासन ज़िम्मेदार है

हिन्दुस्तान के मशहूर शहर लखनऊ में कल इमाम हज़रत अली अ. की शहादत के सिलसिले में निकाल गए ताबूत के जुलूस में बहाबी आतंकवादियों के हमले की हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सय्यद कल्बे जवाद नक़वी नें कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा कि मौलाए काएनात के ताबूत पर होने वाले हमला, कुछ महीनों पहले लखनऊ के वज़ीरगंज में मजलिस में हुए हमले के विषय में प्रशासन की लापरवाही की वजह से चरमपंथियों का हौसला बढ़ने की वजह से हुआ।मजलिसे ओलमाए हिंद के जनरल सिक्रेट्री मौलाना सय्यद कल्बे जवाद नक़वी नें कहा कि शांतिपूर्ण धार्मिक जुलूस के अपमान में पूरी तरह से प्रशासन ज़िम्मेदार है। अगर प्रसासन की ढ़ील न होती तो लकनऊ में वहाबी तंकवादियों की इतनी हिम्मत नहीं थी। उन्होंने कहा कि इतने बड़े जुलूस में पुलिस की व्यवस्था बहुत कम थी और दंगे के बाद भी पुलिस नें हमारे लोगों पर ही लाठियां बरसाईं, घरों में घुस कर औरतों का अपमान किया जबकि प्रशासन अच्छी तरह जानता है कि अपराधी कौन हैं।मौलाना कल्बे जवाद नक़वी नें प्रशासन से घटना की तुरंत जाँच और अपराधियों को गिरफ़्तार करने की मांग की उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस मामले में ढ़ील करेगी तो लखनऊ के सभी अज़ादार शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिये सड़कों पर निकल आएंगे।याद रहे कि कल सुबह हज़रत अली अ. के ताबूत के जुलूस के दौरान कुछ अराजक तत्वों नें पथराव कर दिया था जिसके बाद शिया और सुन्नियों के बीच कई बार हिंसक झड़पे हुईं और इस दौरान पुलिस मूक दर्शक बनी रही।